Total Pageviews

Blog Archive

मेरी नजर से

Thursday, May 5, 2011

मेरी लेखनी

कलम की स्याही कहने लगी,
मुझसे कि कुछ ख़ास लिखो...
देखो मैं छनकर आई हूँ,
चमकीला रंग हृदयों में भरो... 


खट्टी इमली का स्वाद लिखो                 
तितली-पतंग की याद लिखो... 
शरारत के एहसास लिखो, 
बीते पल का इतिहास लिखो;
निर्मल नीला जल लाई हूँ, 
अर्पित उर के उल्लास करो....


मुझमे शोणित-सा जोश भरा,
व्यापक, अनंत आलोक मेरा...
पारस हूँ, बस तुम छू जो लो,
स्वर्णिम कल के तब दर खोलो...
उमंग-तरंग-सी छाई हूँ,
साँसों में यह सब भर लो...

नदिया-सी निरंतर बहती चली,
मानव- गाथा यूँ कहती चली;
पीड़ित पथिकों को आस दिया
साहस-धीरज-विश्वास दिया...
साथी बनकर मै आई हूँ,
मुझ संग सपने साकार करो...!!

No comments: